दुख का विलाप ना बनायें पूजा -खुशियों का उत्सव है

जैसे हम जीवन में अच्छे पल को यादगार बनाना चाहते हैं और अपने इन बेहतरीन पल मेें उत्सव करते हैं और अपने लोगों को एकत्रित कर उत्सव मनाते हैं जैसे विवाह, बच्चे का जन्म, दिपावली या होली जैसे त्योहारो का मनाना अथवा जन्मदिन अथवा विवाह की सालगिरह का उत्सव मनाकर खास बनाते हैं और वहीं जब भी हम परेशान या कष्ट में होते हैं अथवा अपने जीवन में असफलता अथवा दुख का सामना कर रहे होते हैं तो पूजा-पाठ या तीर्थयात्रा करते हैं। किंतु कहा गया है कि दुख में सुमरन सब करें सुख में करें ना कोई, जो सुख में सुमरन करें तो दुख काहें को होई। अथार्त यदि हम जीवन में सुख तथा खुशियों में भी समस्त प्रकार की पूजा अथवा यज्ञ करें तो जीवन में कष्ट ही ना हों अतः जब भी आपके जीवन में सुख या कोई खुशियों का पल आये ंतो ईश्वर को धन्यवाद दें और अपने जीवन में कष्ट को दूर रखने हेतु विभिन्न पूजा अथवा यज्ञ करें जिसे आप अपने दुख के समय करने के प्रयोजन करते हैं। इससे आपके जीवन में कभी भी दुख का समावेश नहीं होगा। इस प्रकार आपका कोई भी खास पल हो ईश्वर को याद जरूर करें तथा पूजा करें तो दुख से हमेशा दूर रहेंगे कहा भी गया है कि विपद विस्मरणं विष्णोः सम्पन्नारायणस्मृतिः ॥
विपत्ति यथार्थ में विपत्ति नहीं है, सम्पत्ति भी सम्पत्ति नहीं। भगवान का विस्मरण होना ही विपत्ति है और सदैव उनका स्मरण बना रहे, यही सबसे बड़ी सम्पत्ति है। अतः सुख या संपत्ति के समय ईश्वर याद रहें तो विपत्ति नहीं आयेगी और ईश्वर हमेशा पास रहेंगे। इसके लिए विष्णु की पूजा करना, अन्न का दान करना तथा जरूरतमंदों की सेवा करनी चाहिए।

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