कुंडली में दशाफल

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में फल शब्द कर्मफल का वाचक एवं बोधक है। क्योंकि कर्मफल वर्तमान जीवन में उसके घटनाचक्र के रूप में घटित होते हैं, अतः जीवन में घटित होने वाली घटनाओं को अथवा जीवन के घटनाचक्र को भी फल कहते हैं। कर्मफल जन्म जन्मांतरों में अर्जित कर्मों का फल होता है, जिसे यह शास्त्र…

कर्म और किस्मत

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से अगर कुंडली में योग नहीं है तो फल मिलने की संभावना नहीं है, यानि आपकी किस्मत में वह फल नहीं है और मिल भी नहीं सकते। और अगर कुंडली में संभावना या योग है तो आपकी किस्मत में वह फल लिखे हैं और अनुकूल दशा-गोचर पर आपको वह फल प्राप्त होने चाहिये।…

कुंडली में शनि का गोचर फल

कुंडली में यदि शनि ग्रह बलशाली हो तो जातक को आवासीय सुख प्रदान करता है। दुर्बल शनि शारीरिक दुर्बलता-शिथिलता, निर्धनता, प्रमाद एवं व्याधि प्रदान करता है शनि ग्रह किसी भी एक राशि में लगभग 2 वर्ष 6 माह विचरण करते हुये लगभग 30 वर्ष में 12 राशियों का भोग करते हैं। शनि ग्रह के इस…

मन के हारे हार है मन के जीते जीत !!!

मनुष्य की समस्त जीवन प्रक्रिया का संचालन उसके मस्तिष्क द्वारा होता है। मन का सीधा संबंध मस्तिष्क से है। मन में हम जिस प्रकार के विचार धारण करते हैं हमारा शरीर उन्हीं विचारों के अनुरूप ढल जाता है। हमारा मन-मस्तिष्क यदि निराशा व अवसादों से घिरा हुआ है तब हमारा शरीर भी उसी के अनुरूप…

क्यों हो जाता है नवजात शिशु को पीलिया – जाने ज्योतिषीय कारण

हिंदू दर्शन के अनुसार, मनुष्य के जन्म के पीछे उस वंश का अंश होता है अतः यदि किसी बच्चे में जन्म से या तत्काल बाद से कोई गंभीर बीमारी दिखाई दे या स्वास्थ्यगत कष्ट हो तो दिखाए कि उसकी कुंडली में प्रमुख ग्रह कहीं राहु से पापाक्रांत तो नहीं हैं। क्योंकि गंभीर बीमारी की स्थिति…

वास्तु अनुसार बच्चों का कमरा

माता-पिता की यह उत्कट अभिलाषा होती है कि बच्चों को हर प्रकार की सुख-सुविधा उपलब्ध कराएं, अच्छी से अच्छी शिक्षा प्रदान करें, खेलकूद-मनोरंजन की समुचित व्यवस्था करें ताकि बच्चों का समग्र विकास हो सके। बच्चों का कमरा उनके लिए मनोरंजन, मस्ती और उल्लास का केंद्र होता है। उनका रूम जितना अधिक वास्तु सम्मत होगा उतना…

कुंडली में पंचम,नवम एवं द्वादश भाव में संबंध….

हिंदू ज्योतिष कर्म तथा पुनर्जन्म के सिद्धांत पर आधारित है। यह तथ्य प्रायः सभी ज्योतिषी तथा ज्ञानीजन अच्छी तरह से जानते हैं। मनुष्य जन्म लेते ही पूर्व जन्म के परिणामों को भोगने लगता है। जैसे फल फूल बिना किसी प्रेरणा के अपने आप बढ़ते हैं उसी तरह पूर्वजन्म के हमारे कर्मफल हमें मिलते रहते हैं।…

विवाह के लिए सार्थक समय

भारतीय संस्कृति में विवाह को एक ऐसा पवित्र संस्कार माना गया है जो कि समाज में नैतिकता और मानव जीवन में निरंतरता बनाये रखने के लिए आवश्यक है। प्राचीन काल में विवाह की प्राथमिकताएं कुछ हट कर थी। उपरोक्त के अतिरिक्त कन्याओं का अल्प आयु में विवाह विलासी और कामुक राजाओं, सामंतों तथा अंग्रेज शासकों…

चतुर्थ भाव में शनि एवं उसके ज्योतिष्य फल

ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह के अनेक नाम हैं – सूर्य पुत्र, अस्ति, शनैश्चर इत्यादि। अन्य ग्रहों की अपेक्षा जो ग्रह धीरे-धीरे चलता हुआ दिखाई देता है उसे ही हमारे ऋषि मुनियों ने ‘‘शनैश्चर ‘‘अथवा ’शनि’ कहा है। पाश्चात्य ज्योतिष में इसे ‘‘सैटर्न’’ कहते हैं। जनसाधारण में इसे सर्वाधिक आतंकवादी ग्रह के रूप में जाना…