दमा और उसके ज्योतिष्य उपाय

दमा को आयुर्वेद में श्वांस रोग कहते हैं। शरीर में कफ और वायु दोषों के असंतुलित हो जाने के कारण यह रोग होता है। बढ़ा हुआ कफ फेफड़े में एकत्र होने पर उसकी कार्यक्षमता में बाधा पहुंचती है और सांस के द्वारा लिये गये और छोड़े गये वायु के आवागमन में अवरोध उत्पन्न होता है।…

क्या लग्न से रत्न चयन हो सकता है???

लग्न व्यक्तित्व का द्योतक है। मेषादि बारह लग्नों में अलग-अलग रत्न चयन या धारण करने का महत्व है। दशा-अंतर्दशा अथवा गोचर में कुछ समय के लिए रत्न धारण कर सकते हैं, लेकिन मुख्यतया लग्नेश, पंचमेश एवं भाग्येश के रत्न धारण करने से जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति मिल सकती है। विभिन्न लग्नों के…

गृह वास्तु

किसी व्यक्ति विशेष के गृह वास्तु निरीक्षण से उसकी ओर उसके परिवार की स्थिति का काफी हद तक अंदाजा लग जाता है। इसका कारण यह है कि जिस प्रकार सृष्टि एवं मानव पंचमहाभूत तत्वों (आकाश, वायु, पृथ्वी, जल एवं अग्नि) से बने हैं, उसी प्रकार वास्तु भी इन्हीं तत्वों क े परस्पर समन्वय पर आधारित…

कुंडली में शुक्र चन्द्रमा युति के फल

शुक्र-चंद्रमा की युति सौंदर्यप्रदायकसुंदरता अपने आप में काफी मनमोहक होती है। हर व्यक्ति, हर नर-नारी अपने आप को सुंदर दिखाने की कोशिश करता है और इसके लिए अनेक प्रयास भी करता है। लेकिन प्राकृतिक सौंदर्य अपने आप में अलग होती है। यहां सौंदर्य से तात्पर्य व्यक्ति की बनवाट से है जो व्यक्ति को आकर्षित करती…

दांपत्य जीवन में राहु का दुष्प्रभाव

विवाह व दाम्पत्य जीवन का आकलन जन्मकुंडली के सप्तम भाव से किया जाता है। पुरुष की कुंडली में शुक्र ग्रह पत्नी व विवाह (कलत्र) कारक होता है तथा स्त्री की कुंडली में बृहस्पति पति तथा दाम्पत्य सुख का कारक होता है। ‘‘ज्योतिष नवनीतम्’’ ग्रंथ के अनुसारः गुरुणा सहिते दृष्टे दारनाथे बलान्विते। कारके वा तथा पतिव्रतपरायणा।।…

ग्रहों के कारक घर

हर ग्रह के कारक घर, स्थायी घर, उच्च-नीच घर आदि निश्चित हैं। फिर भले ही वह ग्रह ‘अतिथि’ बने या किरायेदार! ग्रह का समय पूरा होने पर ग्रहरूपी दीया बुझ जाएगा। हर ग्रह उसकी अपनी राशि में, भले ही वह राशि अन्य ग्रह की कारक क्यों न हो, शुभ फल ही देगा। ग्रह जिस घर…

जन्मकुंडली में शनि का गोचरीय फल

कुंडली में यदि शनि ग्रह बलशाली हो तो जातक को आवासीय सुख प्रदान करता है। निम्न वर्ग का नेतृत्व प्राप्त होता है। दुर्बल शनि शारीरिक दुर्बलता-शिथिलता, निर्धनता, प्रमाद एवं व्याधि प्रदान करता है- मन्दे पूर्णबले गृहादिसुखृद भिल्लाधिपत्यं भवेन्नयूने विलहरः शरीरकृशता रोगोऽपकीर्तिर्भवेत।। शनि ग्रह किसी भी एक राशि में लगभग 2 वर्ष 6 माह विचरण करते…

मिथुन लग्न में मंगल का प्रभाव

मिथुन लग्न में जन्म लेने वाले जातकों की जन्मकुंडली के विभिन्न भावों में मंगल का प्रभाव (फल) निम्नानुसार जान लेना चाहिए- लग्न (प्रथम भाव) में स्थित मंगल के प्रभाव से जातक को शारीरिक श्रम ट्टारा धन का यथेष्ट लाभ होता है तथा शत्रु पर विजय प्राप्त होती है । माता एवं सुख के पक्ष में…

वृषभ लग्न में मंगल का प्रभाव

वृषभ लग्न में जन्म लेने वाले जातकों की जन्मकुंडली के विभिन्न भावों में मंगल का प्रभाव (फल) निम्नानुसार जान लेना चाहिए लग्न (प्रथम भाव ) में बैठे मंगल के प्रभाव से जातक को शारीरिक शक्ति का लाभ होता है तथा बाहरी क्षेत्रों से अच्छे संबंध स्थापित होते हैं । उसे धातुक्षीणता, रजत-विकार, निर्बलता आदि की…

Astrological combinations for brothers and sisters

For instilling confidence of public in general in astrology and astrologers, certain principles described in the classics and ancient texts of astrology should be aptly kept in mind while describing any aspect of human life; specially about siblings. The prediction attains accuracy when dictums of classical text and learned scholar’s analysis are taken cognisance of…