मूल नक्षत्र

श्रीरामचरितमानस के रचियता गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म अभुक्त मूल नक्षत्र हुआ था। दरअसल अभुक्त मूल नक्षत्र यानी ज्येष्ठा नक्षत्र की अन्त की दो घड़ी तथा मूल नक्षत्र की आदि की दो घडी अभुक्त मूल कहलाती है। लेकिन यह बातें तब मानी जाती हैं। जब जातक के माता- पिता पहले से ही धर्म कार्यों के…

विवाह हेतु महत्वपूर्ण ग्रहों की दृष्टि

हमारे शास्त्रों में 16 संस्कार बताये गये हैं जिनमें विवाह सबसे महत्वपूर्ण संस्कार है। हमारे समाज में जीवन को सुचारू रूप से चलाने एवं वंश को आगे बढ़ाने के लिए विवाह करना आवश्यक माना गया है। जब हम कुंडली में विवाह का विचार करते हैं तो उसके लिए नौ ग्रहों में सबसे महत्वपूर्ण ग्रह गुरु,…

नक्षत्रों के दर्पण में शुभ मुहूर्त

नामकरण, मुंडन तथा विद्यारंभ जैसे संस्कारों के लिए तथा दुकान खोलने, सामान खरीदने-बेचने और ऋण तथा भूमि के लेन-देन और नये-पुराने मकान में प्रवेश के साथ यात्रा विचार और अन्य अनेक शुभ कार्यों के लिए शुभ नक्षत्रों के साथ-साथ कुछ तिथियों तथा वारों का संयोग उनकी शुभता सुनिश्चित करता है। नक्षत्र ही भारतीय ज्योतिष का…

आइ.ए.एस. तथा आइ.पी.एस जैसे उच्च पदाधिकारि बनने के ज्योतिष्य योग

आइ. ए. एस. तथा आइ. पी. एस बनने के ज्योतिषीय योग प्रश्नः सरकारी नौकरी में आई. ए. एस., आइ. पी. एस. जैसे उच्च पदाधिकारी बनने के ज्योतिषीय योगों की सोदाहरण चर्चा करें। भारत देश को स्वतंत्र हुए छ दशक व्यतीत हो चुके हैं, परंतु हमारे मन मस्तिष्क पर आज भी नौकरशाहों का प्रभुत्व विद्यमान है।…

क्यूँ भगवान शिव की पूजा लिंग के रूप में होती है……

शिव शंभु आदि और अंत के देवता है और इनका न कोई स्वरूप है और न ही आकार वे निराकार हैं. आदि और अंत न होने से लिंग को शिव का निराकार रूप माना जाता है, जबकि उनके साकार रूप में उन्हें भगवान शंकर मानकर पूजा जाता है. केवल शिव ही निराकार लिंग के रूप…

क्यूँ है भगवान शिव को सावन मास प्रिय…..

पूरे देश में सावन के महीने को एक त्योहार की तरह मनाया जाता है और इस परंपरा को लोग सदियों से निभाते चले आ रहे हैं. भगवान शिव की पूजा करने का सबसे उत्तम महीना होता है सावन लेकिन क्या आप जानते हैं कि सावन के महीने का इतना महत्व क्यों है और भगवान शिव…

जाने कौन से ग्रह आपको अहंकारी बनाते हैं

एक ही परमशक्ति पूरे ब्रह्मांड को चलाती है. फिर वो इंसान हो या कुदरत. लेकिन फिर भी कुछ लोग अपनी शक्ति और सामर्थ्य के गुमान में अहंकारी हो जाते हैं और अपने ही हाथों अपना भाग्य बिगाड़ लेते हैं. धन-वैभव और वंश का अहंकार. ज्ञान और सौंदर्य का अहंकार. बुद्धि और ताकत का अहंकार या…