वर्तमान युग में दांपत्य जीवन

दाम्पत्य पुरुष और प्रकृति के संतुलन का पर्याय है। यह धरती और आकाश के संयोजन और वियोजन का प्रकटीकरण है। आकाश का एक पर्याय अंबर भी है जिसका अर्थ वस्त्र है। वह पृथ्वी को पूरी तरह अपने आवरण मेंं रखता है। वह पृथ्वी के अस्तित्व से अछूता नहीं रहना चाहता। पुरुष और आकाश मेंं कोई…

बाबा बैजनाथ धाम की कथा……

बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक पवित्र वैद्यनाथ शिवलिंग झारखंड के देवघर में स्थित है. इस जगह को लोग बाबा बैजनाथ धाम के नाम से भी जानते हैं. कहते हैं भोलेनाथ यहां आने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. इसलिए इस शिवलिंग को ‘कामना लिंग’ भी कहते हैं. 12 ज्योतिर्लिंगों के लिए कहा जाता है…

शनि सिखाता है धैर्य……..

धैर्यवान होना सरल काम नहीं है और यह कहना शायद गलत न हो कि आज की दुनिया मेंं धैर्यवान बनना सबसे कठिन काम हैं। धैर्यवान होना बहुत अच्छी विशेषता है जिसे विकसित होना चाहिए। धैर्यवान बनने के लिए अभ्यास सरल काम नहीं है किन्तु जो लोग धैर्यवान होते हैं उन्हें विभिन्न मार्गों से इसका फल…

वर्षा का आतिथ्य करें……..

भारत की प्रमुख 4 ऋतुओं में से पावस ऋतु एक महत्वपूर्ण एवं उपयोगी ऋतु है। यह जीवन दायिनी ऋतु है। अन्न-जल और धान्य का बरखा से अटूट सम्बन्ध है, जिसके बिना मनुष्यों का जीवन संभव न होता। देखा जाए तो अभी वर्षा का गर्भकाल चल रहा है। आर्द्रा प्रवेश षष्ठी तिथि, वृश्चिक लग्न में हो…

ज्योतिष में आर्ष पद्धति……..

वैदिक ग्रंथों तथा वेदांग ज्योतिष का अध्ययन करने से स्पष्ट होता है कि भारत में नक्षत्र ज्ञान अपने उत्कर्ष पर रहा है। इसी कारण नक्षत्र ज्ञान तथा नक्षत्र विद्या का अर्थ ‘ज्योतिष’ माना जाने लगा। ज्योतिष का प्रचलित अर्थ हुआ वह षास्त्र जिसमें ज्योति का अध्ययन हो। वास्तव में ज्योतिष नक्षत्र आधारित विज्ञान ही है।…

ज्योतिष में कर्म और भाग्य की व्याख्या………

ज्योतिष कर्म एवं भाग्य की सही व्याख्या करता है। प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्मों के आधीन रहता है इसलिए उसे कर्म अवश्य करना है और जीवन का सार यही है। प्रत्येक कर्म का प्रतिफल होता है- यह एक सर्वमान्य सत्य है। वैदिक विचारधारा यह बताती है कि कर्म और उसका प्रतिफल एक साथ कार्य नहीं करते।…